आता नहीं है सवाल तो मुझे जवाब पूछ। पीड़ा की गिनती और दुःख का हिसाब पूछ।
बूंदों में टपकता है झरने का पानी वो। पियासी है गंगा हायती वो आब पूछ।
आता नहीं है सवाल तो मुझे जवाब पूछ…..
कागज के फूल चूमती तितली दीवानी ।कहा गया वो गेंदा, चमेली गुलाब पूछ।
आता नहीं सवाल तो मुझे जवाब पूछ……
सागर को समेटने की लल्सा ही मार गई।बूंदों को तरसती वो बोली तालाब पूछ।
आता नहीं सवाल तो मुझे जवाब पूछ …….
धरती को दाव पर लगाया एश की खातिर। हारे हुए जवारी को घाटा वा लाभ पूछ।
आता नहीं सवाल…..
सूरज ना उगने दे अंधेरे का अंधेर देख। चांद को खिलाने का मेरा वह ख्वाब पूछ।
आता नहीं सवाल….
धरती पर चैन बांटे, जीने की राह दे। ऐसा कोई ज्ञान ढूंढ ऐसी किताब पूछ
आता नहीं सवाल तो मुझे जवाब पूछ।
स्वाति ठाकुर